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उदास पानी में डूबा चाँद
प्रकाशक: हिन्द युग्म प्रकाशन
(3 customer review)

100 (-33%)

Age Recommendation: Above 12 Years
ISBN: 978-8195128600 SKU: HY2320 Category:

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3 reviews for उदास पानी में डूबा चाँद

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Image #1 from Darshan Jogi
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Darshan Jogi

रोचक कहानियां. उदास पानी में डूबा चांद - एक क्लासिक किताब है. इस किताब को हर उस व्यक्ति को पढ़ना चाहिए जो हिंदी साहित्य में किसी खास कहानी की तलाश में रहता है.

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  1. Avatar

    anurag.eib

    खूबसूरत किताब

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  2. Avatar

    Darshan Jogi

    रोचक कहानियां. उदास पानी में डूबा चांद – एक क्लासिक किताब है. इस किताब को हर उस व्यक्ति को पढ़ना चाहिए जो हिंदी साहित्य में किसी खास कहानी की तलाश में रहता है.

    Image #1 from Darshan Jogi
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  3. Avatar

    Aman tasera

    Abhi tak mene padha nhi hai so no idea for book

    (4) (0)
    • Avatar

      सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’ (store manager)

      पढ़ें और अपना नज़रिया बताएं

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नीम तले घास के बिछावन-सी मख़मली कहानियाँ। शफ़्फ़ाफ़ बर्फ़ पर स्कीइंग करते स्कीबाज़-सी फिसलती कहानियाँ। गंगा किनारे सखियों संग दौड़ती अल्हड़ बाला की गंगोत्री जल बरसाती हँसी-सी कहानियाँ। इंतज़ार में बुझती विरहिणी-सी जलती कहानियाँ।

बेफिक्र, बेलौस यारों संग मुसीबतों की खिल्ली उड़ाती कहानियाँ। इस संग्रह ‘उदास पानी में डूबा चाँद’ की कहानियों में ऐसे कितने ही रंग हैं जो आपको अपने रंग में रंग लेंगे। कहीं मिलन तो कहीं बिछड़न!

कहीं साहसी निर्णय लेती आत्मनिर्भर नायिका तो कहीं सूखे पत्ते-सा टूटकर गिर गया नायक जो धूल झाड़ फ़िर खड़ा होने का हौंसला करता है। लेखक नीरज कुमार उपाध्याय की अनेक रंगों की इन चौदह कहानियों में आपके डूब जाने और खो जाने का पूरा ख़तरा है; किसी की नीम-बाज़ आँखों में डूबकर, किसी की नींद खो जाने-सा।

Book Details

Weight 200 g
Dimensions 13 × 1.5 × 20 cm
Pages:   160

नीम तले घास के बिछावन-सी मख़मली कहानियाँ। शफ़्फ़ाफ़ बर्फ़ पर स्कीइंग करते स्कीबाज़-सी फिसलती कहानियाँ। गंगा किनारे सखियों संग दौड़ती अल्हड़ बाला की गंगोत्री जल बरसाती हँसी-सी कहानियाँ। इंतज़ार में बुझती विरहिणी-सी जलती कहानियाँ। बेफिक्र, बेलौस यारों संग मुसीबतों की खिल्ली उड़ाती कहानियाँ। इस संग्रह ‘उदास पानी में डूबा चाँद’ की कहानियों में ऐसे कितने ही रंग हैं जो आपको अपने रंग में रंग लेंगे।

कहीं मिलन तो कहीं बिछड़न! कहीं साहसी निर्णय लेती आत्मनिर्भर नायिका तो कहीं सूखे पत्ते-सा टूटकर गिर गया नायक जो धूल झाड़ फ़िर खड़ा होने का हौंसला करता है। लेखक नीरज कुमार उपाध्याय की अनेक रंगों की इन चौदह कहानियों में आपके डूब जाने और खो जाने का पूरा ख़तरा है; किसी की नीम-बाज़ आँखों में डूबकर, किसी की नींद खो जाने-सा।

‘डायरी के वासंती पन्नों से सरगोशी करते-करते कब यह लिखने का सफ़र अपनी ख़ुद की किताब तक आ पहुँचा; अहसास बेहद रुमानी है’ अक्सरहाँ दोस्तों से यह कहने वाले उत्तर प्रदेश, मेरठ शहर के नीरज कुमार उपाध्याय ने जितना शहरों को जिया उतना ही गाँवों की हरियाली, नदी, नहरों, बागों, पंछियों को क़रीब रहकर जाना। तमाम लोगों और अपनी ज़िंदगी को कभी सुकूँ तो कभी आह जनित बेख़याली़ से पढ़ते हुए; देखे-भोगे को लिखते हुए; कब यह किताब तैयार हो गई वह ख़ुद हैरत में हैं! पहले अँग्रेज़ी साहित्य और फिर हिंदी साहित्य से स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट) नीरज कुमार उपाध्याय का यह कहानी-संग्रह, ‘उदास पानी में डूबा चाँद’ पाठकों के समक्ष हाज़िर है।