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तुमने तो कहा था
प्रकाशक: सन्मति प्रकाशन
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ISBN: 978-9390539895 SKU: SM1933 Category: Tag:

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    anurag.eib (सहपाठी)

    Very good

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तुमने कहा तो था प्यार, दोस्ती, कुर्बानी, शादी और परिवार के बीच उलझे गौतम, तनुश्री, रौनक और सौम्या की कहानी है। इनमें कौन क्या चुनता है?

Book Details

Weight 367 g
Dimensions 13.97 × 1.65 × 21.59 cm
Pages:   288

तुमने तो कहा था – प्यार जीवन की आवश्यकता है और जीवन का केंद्र परिवार है। परिवार के साथ दोस्ती की अहमियत को भी झुठलाया नहीं जा सकता लेकिन दोस्ती जब प्यार में तब्दील होने लगती है तो शादी के नाम पर परिवार के समीकरण गड़बड़ाने लगते हैं। शादी कर पति पत्नी बने दो अजनबी प्यार की दुनिया में उतर पाते हैं या केवल देह के दायरों में ही सिमटकर रह जाते हैं? ये रहस्य सदियों से अनसुलझी पहेली ही है लेकिन इस बात की संभावना प्रबल है कि प्यार कर शादी की दुनिया में उतरने वाले प्रेमी-प्रेमिका प्यार को और गहराई से अनुभव कर देह के दायरों से कहीं दूर निकल पाने की संभावना को झुठला नहीं सकते। बेशक! जीवन में प्यार, दोस्ती और परिवार दोनों ही बहुत जरूरी हैं लेकिन कभी-कभी प्यार की पहली किरण को अपनी मुट्ठी में कैद कर परिवार के लिए कुर्बानी भी देनी पड़ती है। वैसे हमसफर जब साथ हो तो हर उम्र में प्यार लुभाता ही है लेकिन उम्र के दायरों में बंधी जिन्दगी के सवाल जब प्यार को सताने लगते हैं तो एक प्रेम कहानी का जन्म होता है। प्यार, दोस्ती, कुर्बानी, शादी और परिवार के बीच उलझे हुए अलग-अलग उम्र का प्रतिनिधित्व कर रहे गौतम तथा नीरा के साथ, तनुश्री और फिर रौनक और सौम्या अपने पहले प्यार, परिवार और कुर्बानी में से किसे चुनते हैं? “उसके हिस्से का प्यार”, “गुलाबी छाया नीले रंग” और “उस मोड़ पर” के लेखक आशीष दलाल की कलम से चित्रित चिरस्थाई प्रेम पर आधारित हृदयस्पर्शी कहानी “तुमने तो कहा था” निश्चित रूप से आपके दिल को छू लेगी।

ग्वालियर (म. प्र.) में जन्में, खरगोन (म. प्र.) में शिक्षा प्राप्त कर बड़ौदा (गुजरात) में स्थाई रूप से बस चुके आशीष दलाल की तुमने तो कहा था से पहले तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। गौर करने लायक बात यह है कि यह तीनों ही पुस्तकें अलग अलग विधाओं में लिखी गई है। "उसके हिस्से का प्यार" आशीष का पहला कहानी संग्रह है जो रोजमर्रा की घटनाओं पर बुनी गई 17 कहानियों का अनूठा प्रेमभरा संग्रह है। "उस मोड़ पर" उपन्यास प्रेम विवाह को लेकर परिवार के साथ संघर्ष और सामंजस्य की गाथा है। "गुलाबी छाया नीले रंग" गुजरात हिन्दी साहित्य अकादमी की अनुशंसा से प्रकाशित 82 लघुकथाओं का जीवन के विविध पहलुओं पर आधारित संग्रह है।