Skip to content

549 या अधिक की खरीद पर डिलीवरी फ्री

449 या अधिक की खरीद पर कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प उपलब्ध (COD Charges: INR 50)
something sarpila
(1 customer review)

140 (-30%)

Age Recommendation: Above 12 Years
ISBN: 978-93-92829-00-0 SKU: SV2533 Category:

Free Shipping for SV Prime Members

Estimated Dispatch: November 28, 2022

Check Shipping Days & Cost //

1 review for Something Sarpila | समथिंग सर्पीला

5.0
Based on 1 review
5 star
100
100%
4 star
0%
3 star
0%
2 star
0%
1 star
0%
  1. Avatar

    anurag.eib (सहपाठी)

    Shandar

    (0) (0)

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.

Cancel

More Info

Something Sarpila – ये सच है कि साँप ही वह जंगली जीव है जिसके काटने से सबसे ज्यादा लोग मरते हैं फिर सबसे ज्यादा इंसानों की हत्या का जिम्मेदार जीव इंसान के संरक्षण का हकदार कैसे बन गया? क्योंकि साँप ही वह जंगली प्राणी भी है जिसने सबसे ज्यादा लोगों की जान बचायी है.

बनकिस्सा और बात बनेचर की अपार सफलता के बाद लेखक सुनील लौटे हैं उस नायक को लेकर जिसे हमारी एकपक्षीय सोच ने खलनायक बना दिया है. यह स्नेक फोबिया को फिलिया में बदल देनेवाली किताब Something Sarpila है.

अब साँप से वही डरेगा जो नहीं पढ़ेगा.

Book Details

Weight 240 g
Dimensions 21 × 14 × 2 cm
Pages:   

Something Sarpila – बनकिस्सा और बात बनेचर की अपार सफलता के बाद लेखक सुनील लौटे हैं उस नायक को लेकर जिसे हमारी एकपक्षीय सोच ने खलनायक बना दिया है. यह स्नेक फोबिया को फिलिया में बदल देनेवाली किताब Something Sarpila है. अब साँप से वही डरेगा जो नहीं पढ़ेगा.

सुनील कुमार ‘सिंक्रेटिक’ मूल रूप से भोजपुर, बिहार के रहनेवाले। वर्तमान में राज्य सरकार में पदाधिकारी। बचपन से जीव-जंतुओं, वन्य प्राणियों में रुचि रही। वर्तमान हिन्दी में अपनी विधा के एक मात्र लेखक हैं। सब किस्सा लिखते हैं, ये बन किस्सा। इनकी प्रसिद्धि इंसानी चरित्र के मुताबिक जानवरों को ढूंढकर ऐसी कहानी गढ़ने की है कि जंगल का सामान्य सा किस्सा, कब मनुष्य का जीवन-किस्सा बन जाता है, पता ही नहीं चलता। विजुअल मोड इनकी लेखनी की विशेष शैली है। पढ़ने के साथ कहानी आँखों के सामने घूमने लगती है। इनकी पहली किताब ‘बनकिस्सा’ पाठकों के बीच ‘मॉडर्न पंचतंत्र’ के रूप में विख्यात है। दूसरी किताब ‘बात बनेचर’ की चर्चा चहुंओर हो रही है। पहला संस्करण शुरु होते ही खत्म हो गया है। दूसरा संस्करण अपनी दोगुनी रफ़्तार से पाठकों के बीच अपनी जगह बना रहा है। Something Sarpila के लिए सुनील जी ने महीनों साँप पर रिसर्च करने के बाद लिखा है। जैसे एक कहावत है कि कोई उड़ती चिड़िया के पर गिन लेता है (जबकि सबको पता है वो दो ही होते हैं), उसी तर्ज पर सुनील जी साँप की पूँछ की मात्र झलक देखकर बता सकते हैं कि ये कौन सा साँप है, डसने आया है या छुपने, ज़हरीला है या नहीं, इसको भगाने के उपाय क्या हैं? यह इनकी तीसरी किताब है।