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शर्ट का तीसरा बटन
प्रकाशक: हिंदयुग्म प्रकाशन
(1 customer review)

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ISBN: 978-9392820328 SKU: HY2015 Category:

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1 review for Shirt Ka Teesra Button | शर्ट का तीसरा बटन – मानव कौल

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    bookishreader2010

    मानव कौल को मैंने दूसरी बार पढ़ा है, इससे पहले ‘ ठीक तुम्हारे पीछे ‘ पढ़ी थी। इस किताब के बारे में एक लाइन में कहूँ तो ये एक ऐसी किताब है जो हर एक किशोर स्वयं की ही कथा लगेगी।। किशोरावस्था में प्रवेश करने पर कैसे मानसिक कठिनाइयों एवं उथल पुथल से गुज़र न परता है, ये किताब बखूबी बताती है। किताब के प्रारम्भ में सब कुछ काफी मजेदार और मनोरंजक होता है लेकिन धीरे धीरे ये किताब अपने मूल भाव पर पहुँचती जाती है यानी अपने शीर्षक ” शर्ट का तीसरा बटन ” पर ॥

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मैं अपने घर में थी जब मैंने ‘अपराध और दंड’ पढ़ी थी और घर छोड़ते ही मैंने ‘चित्रलेखा’ पढ़ना शुरू किया था। बहुत कोशिश के बाद भी मैं ‘अपराध और दंड’ को छोड़ नहीं पाई। मैंने उसे अपने बैग में रख लिया। बीच-बीच में ‘चित्रलेखा’ पढ़ते हुए मैं ‘अपराध और दंड’ के कुछ हिस्सों को टटोलने लगती। और तब कुछ अलग पढ़ने का मन करता, और लगता कि काश अगर चित्रलेखा एक ख़त रस्कोलनिकोव को लिख दे तो मैं इस वक़्त उस ख़त को पढ़ना चाहूँगी। मैं उस पुल पर देर तक टहलना चाहती थी जिससे ये दो अलग दुनिया जुड़ सकती थीं। (उपन्यास की भूमिका से)

Book Details

Weight 210 g
Dimensions 9.8 × 1.4 × 12.9 cm
Pages:   240

शर्ट का तीसरा बटन में तीन कहानियाँ एक-दूसरे से गुँथी हुई हैं। राज़ील और उसके दोस्तों की कहानी, राज़ील और ग़ज़ल के प्यार की कहानी और राजिल की माँ आशा की कहानी।

कश्मीर के बारामूला में पैदा हुए मानव कौल, होशंगाबाद (म.प्र.) में परवरिश के रास्ते पिछले 20 सालों से मुंबई में फ़िल्मी दुनिया, अभिनय, नाट्य-निर्देशन और लेखन का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं। अपने हर नए नाटक से हिंदी रंगमंच की दुनिया को चौंकाने वाले मानव ने अपने ख़ास गद्य के लिए साहित्य-पाठकों के बीच भी उतनी ही विशेष जगह बनाई है। इनकी पिछली पाँचों किताबों—‘ठीक तुम्हारे पीछे’, ‘प्रेम कबूतर’, ‘तुम्हारे बारे में’, ‘बहुत दूर, कितना दूर होता है’ और ‘चलता-फिरता प्रेत’ को पाठकों का अथाह प्यार मिला है। शर्ट का तीसरा बटन इनकी आठवीं किताब है।