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Shamshan
प्रकाशक: Self प्रकाशन

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Age Recommendation: Above 12 Years
ISBN: 978-9354736853 SKU: Self2526 Category:

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Shamshan – यह पुस्तक जीवन के परम और अटल सत्य “मृत्यु” के उपरांत जहाँ मानव के भौगोलिक शरीर का अंत होता है जिसे हम Shamshan कहते हैं उस पर लिखा काव्य – सृजन है।

जीवन पर्यन्त सिर्फ पाने की लालसा रखने वाले इंसान के जीवन – संघर्ष, मानव – मूल्य, भौतिकता – नैतिकता, राग – द्वेष, छल – प्रपंच, आशक्ति – विरक्ति के नए आयामों को प्रतिस्थापित करता हुआ यह काव्य – सृजन “सत्य ज्ञान श्मशान” आप सभी को समर्पित है।

Book Details

Weight 180 g
Dimensions 14 × 1 × 21 cm
Pages:   50
Shamshan – यह पुस्तक जीवन के परम और अटल सत्य “मृत्यु” के उपरांत जहाँ मानव के भौगोलिक शरीर का अंत होता है जिसे हम Shamshan कहते हैं उस पर लिखा काव्य – सृजन है।

जीवन पर्यन्त सिर्फ पाने की लालसा रखने वाले इंसान के जीवन – संघर्ष, मानव – मूल्य, भौतिकता – नैतिकता, राग – द्वेष, छल – प्रपंच, आशक्ति – विरक्ति के नए आयामों को प्रतिस्थापित करता हुआ यह काव्य – सृजन “Satya Gyan Shamshan” आप सभी को समर्पित है।

श्री प्रमोद कुमार पाण्डेय का जन्म 04 जनवरी 1963 को बिहार के कैमूर (भभुआ) जिले के जनार्दनपुर गाँव में हुआ था। इनके पिता जी श्री बलि राम पाण्डेय दारोगा और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। इनकी माता जी का नाम रामसखी देवी था। वे अपने सभी भाई बहनों में सबसे छोटे थे। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाँव के पास के ही विद्यालय से की थी। उच्च शिक्षा हेतु इन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। 1979 से लेकर 1993 तक इन्होंने अपनी शिक्षा प्लस टू, बी.ए., एम.ए., बी.एड. और एम. फ़िल. की डिग्री काशी में ही रह कर प्राप्त की। तत्पश्चात सन् 1993 में इन्होंने केंद्रीय विद्यालय संगठन से सामाजिक विज्ञान शिक्षक के रूप में जुड़ गए। इन्होंने विभिन्न विषयों पर अपने शब्दों को अनेकों कविताओं के रूप में पिरोया है। बनारस (तत्कालीन, वाराणसी) शहर से इनका जुड़ाव सिर्फ शिक्षा तक ही सीमित नहीं था, बनारस शहर अपने आप में बहुत से सांस्कृतिक धरोहरों को समेटे हुए सुंदर गंगा घाटों के लिए भी प्रसिद्ध है। श्री प्रमोद कुमार पाण्डेय जी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में शोध-छात्र समकालीन ही मणिकर्णिका घाट पर श्मशान के परिवेश में धनात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हुए काव्य-सृजन "सत्य ज्ञान, श्मशान" के रूप में जीवन के विभिन्न आयामों को अनुपम ढंग से परिलक्षित किया है। इन्होंने सन् 1993 से इस काव्य-सृजन की संरचना को आकार देना शुरू किया और सन् 2020 में इस काव्य-सृजन को अंतिम रूप दिया। अपनी हिंदी साहित्य में अपार रुचि को कविताओं और कहानियों के रूप में इन्होंने आकाशवाणी शहडोल (मध्य प्रदेश) के माध्यम से अनेक कृतियों के रूप में प्रसारित भी किया। श्री प्रमोद कुमार पाण्डेय का निधन 22 जनवरी 2022 को हृदयाघात से हुआ।