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Pani Ka Badla
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ISBN: 978-93-92829-27-7 SKU: SV2573 Category:

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    anurag.eib (सहपाठी)

    Bahut sundar kHani hai

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‘पानी का बदला (Pani Ka Badla)’ बाल कहानी संग्रह की बीस चुलबुली और नटखट बाल कहानियाँ बच्चों को  गुदगुदाएँगीं, हँसाएँगी और चुपके से कुछ अच्छा सिखा जाएँगी।

इन कहानियों में हास्य, चुलबुलापन तो है ही साथ ही नैतिकता, पर्यावरण और आदतों के बारे में भी बात की गई है।

‘कुछ अच्छा हो जाए’, ‘कुहू हँस पड़ी’, ‘दरवाजे के पीछे कौन’ जैसी कहानियाँ बालमन को बड़ी कुशलता से हमारे सामने रख देती हैं।
‘जलपरी से मुलाकात’ कहानी में जलपरी, चालवी और उसकी बाँसुरी हमें किसी और लोक में ले जाती है। मन करता है बाँसुरी की मीठी धुन सी कहानी चलती ही जाए।
‘कौन जीता कौन हारा’ कहानी में खरगोश और कछुए के बीच एक बार फिर रेस होती है उसका क्या परिणाम रहा यह जानना बड़ा ही रोचक है।

कहानियों के किरदार मानव, पशु-पक्षी, जलपरियाँ, फूल-बादल तो हैं ही पर जब किसी कहानी में घास, पेड़, झूला, और पार्क की बेंच भी बोल उठे तो मन खुश हो जाता है। ये सभी किरदार किन कहानियों में है ये जानने के लिए यह संग्रह जरूर पढ़ें। कल्पना की अद्भुत उड़ान से भरा यह प्यारा सा बाल संग्रह बच्चों के मन को जरूर भाएगा।

पानी का बदला | Pani Ka Badla – बच्चों के मन को गुदगुदाते-हँसाते कुछ सीख दे जाने वाली बीस बाल कहानियों का संग्रह

जन्मतिथि:- 24 जनवरी 1970 शिक्षा- MA, BEd साहित्य विधा- हिंदी कहानीकार लेखिका की अब तक तीन सौ से अधिक कहानियाँ, बाल कहानियाँ और लघुकथाएँ देश की प्रख्यात राष्ट्रीय व साहित्यिक पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित हो चुकी हैं। राज्य स्तर पर आयोजित अन्तर्विद्यालय नाट्य प्रतियोगिता में लिए एकांकी का लेखन व निर्देशन कर चुकी हैं जिनमें "जागृति; एक उड़ान " नामक नाटक काफी सराहनीय तथा चर्चित रहा। विद्यालय स्तर के वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाने एवं विभिन्न कार्यक्रमों में नेपथ्य में अपना स्वर दे चुकी हैं। प्रकाशित कहानी संग्रह:- कच्ची मिट्टी- पहला कहानी संग्रह 2013 में प्रकाशित हुई जिसका विमोचन पद्मश्री अशोक चक्रधर द्वारा 2014 दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में हुआ। चिट्ठी- 2017 में सामाजिक सरोकारों को उकेरता तीसरा कहानी संग्रह प्रकाशित हुआ जिसका लोकार्पण लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, लीलाधर मंडलोई एवं डॉ सरोजिनी प्रीतम के सानिध्य में हुआ। आभार तुम्हारा- समाज से उठाए तंतुओ से बुनी सात कहानियों को समाहित करता हुआ यह संग्रह 2020 में प्रकाशित हुआ, जिसका विमोचन प्रख्यात साहित्यकार चित्रा मुद्गल एवं केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निवर्तमान निदेशक प्रो.अवनीश त्रिपाठी के द्वारा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में किया गया। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार के 'हिंदी संस्थान' द्वारा 2020 के सर्जना पुरस्कार के लिए चुना गया। मैं न कहती थी- यह मीनू त्रिपाठी का पांचवां कहानी संग्रह है जो वर्तमान सामाजिक परिवेश का दर्पण है। यह कहानी संग्रह इंडिया नेट बुक्स से हाल ही में 2021 दिसंबर में प्रकाशित हुआ हुआ है। "परख" एवं "कब तक" कहानी संग्रह प्रकाशाधीन हैं। प्रकाशाधीन बाल संग्रह आपका एक पर्यावरण पर आधारित किशोरों के लिए लिखे कहानी संग्रह "वृक्ष मित्र वीर" सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशन के लिये स्वीकृत है। "नल तो ठीक है" एवं "दादी की छड़ी" प्रकाशाधीन हैं। उपलब्धियाँ:- मीनू त्रिपाठी के लिखे पाठ सी बी एस ई तथा आई सी एस सी की विभिन्न कक्षाओं के पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं तथा छात्रों को पढ़ाये जा रहे हैं। इसके साथ ही सी.बी.एस.ई की हिंदी पुस्तक "उद्भव" सीरीज का पुनरावलोकन व संपादन(review and editing) भी मीनू त्रिपाठी ने किया है। 92.5 बिग एफ एम,आकाशवाणी उदयपुर, कोटा से तथा आकाशवाणी दिल्लीबके इंद्रप्रस्थ चैनेल से कहानियों का नियमित अंतराल पर प्रसारण होता रहता।. सम्मान:- "त्रिसुगन्धि साहित्यिक संस्था" द्वारा "साहित्य श्री" सम्मान, "राष्ट्रीय कवि संगम, नाथद्वारा" से "काव्य श्री" सम्मान से सम्मनित "अनुराधा प्रकाशन साहित्यिक संस्थान" द्वारा "साहित्य श्री" सम्मान "कवितालोक सृजन संस्थान, लखनऊ" द्वारा "कवितालोक रत्न" सम्मान से सम्मानित। "राष्ट्रीय कवि संगम- राजस्थान प्रांत, नाथद्वारा" द्वारा आयोजित द्वितीय प्रांतीय अधिवेशन में "काव्य श्री" से सम्मानित। राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा आयोजित नवसाहित्यकार सम्मेलन में कहानी वाचन सत्र में "मुख्य अतिथि एवं साहित्य श्री" सम्मान से सम्मानित। उदयपुर में आयोजित 92.7 बिग एफ एम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में "Women of Substance Award" से सम्मानित। "प्रभा साक्षी वेब पोर्टल" द्वारा "हिंदी सेवा सम्मान" से सम्मानित। हाल ही में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा वर्ष 2020 के लिये उनके कहानी संग्रह "आभार तुम्हारा" को सर्जना पुरस्कार श्रेणी के अंतर्गत 'नरेश मेहता' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विशिष्ट अतिथि तथा निर्णायक मंडल में सम्मिलित हो चुकी हैं। एक सैन्य अधिकारी की पत्नी होने के कारण सेना के विभिन्न सामाजिक और रचनात्मक कार्यक्रमों में प्रतिभागिता कर चुकी हैं। विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सफल संचालन करती रहती हैं वर्तमान में नोएडा में रहकर लेखन कार्य एवं विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रमों में सहभागिता कर साहित्य सेवा कर रहीं हैं। Email:- mtripathi70@gmail.com