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ओए मास्टर के लौंडे – मेरे लिए इसे लिखना ऐसा था जैसे किसी होम्योपैथ को अपनी हिस्ट्री देना, जो कहता है, ‘शुरु से शुरु करो’ और धीरे धीरे वो आपको भीतर तक कुरेद डालता है। वहाँ गहरी अंदरूनी तहों में दबी-छिपी मिलती हैं कुछ कथाएँ, कुछ व्यथाएँ, कुछ परिचित-अपरिचित लोग, कुछ घटनाएँ। इसे लिखने की यात्रा में वे सब मेरे सामने ज़िंदा हो उठे। कुछ ने तो शिकायत भी की, ‘इत्ते दिनों बाद याद आई हमारी!’ और मैं ख़ुद पर शर्मिंदा हो उठी। – दीप्ति मित्तल
शिक्षा-एम.सी.ए.। पिछले 15 वर्षों से स्वतंत्र लेखन। विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं जैसे नंदन, बाल भास्कर, बालभूमि, देवपुत्र, प्लूटो, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, राजस्थान पत्रिका, जनसत्ता, हरिभूमि, प्रभात खबर, मेरी सहेली, सखी, वनिता, फेमिना, सरिता, गृहशोभा आदि में निरंतरता से रचनाएँ प्रकाशित। लगभग 400 कहानियाँ, बाल कहानियाँ, लेख, व्यंग्य प्रकाशित। एक कहानी संग्रह ‘मेरे मन के सोलह मनके’ वनिका पब्लिकेशन, बिजनौर से प्रकाशित। BIG FM रेडियो प्रोग्राम ‘यादों का इडियट बॉक्स विद नीलेश मिश्रा’ के लिए कहानी लेखन। हाईस्कूल और इंटरमीडियेट (यूपी बोर्ड) के लिए कम्प्यूटर साइंस की चार पाठ्य पुस्तकें प्रकाशित।
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