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नैन बंजारे
प्रकाशक: हिंदयुग्म प्रकाशन

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ISBN: 978-9392820069 SKU: HY1903 Category:

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नैन बंजारे दस अलग-अलग मिज़ाज की कहानियों का संग्रह है,जिन्हें लेखक ने बड़े रोचक अंदाज में पेश किया है। इन कहानियों का वितान शहर से लेकर गांव तक छाया है।जिनमें खुद की खोज है तो वहीं रिश्तों से जुड़ने की ललक भी।

Book Details

Weight 130 g
Dimensions 19.8 × 0.9 × 12.9 cm
Pages:   160

बेसिम्त ज़िंदगी की धूप में प्यार के घने साए की ज़रूरत को वही समझ सकता है जो तपते सहरा में पानी की तलाश में भटक रहा हो। खो चुके प्यार की तलाश में बेचैन रूहें भटकने को मजबूर हो ही जाती हैं। उनके नैन बंजारे बने भटकते रहते हैं इधर-उधर। दिन कहीं और रात कहीं। ज़ाहिर है, प्यार की ज़मीन जब बंजर हो जाती है तो अक्सर नैन बंजारे रेगिस्तानों में भटकने लगते हैं। कहानियों के इस संग्रह नैन बंजारे में भी एक तलाश है और उस तलाश के दौरान रास्ते में मिले कुछ पड़ावों की शक्ल में कहानियाँ हैं। इन कहानियों की बुनियाद में दादा-दादी के ‘खिस्से’ ज़रूर हैं, लेकिन इनकी इमारत नई है।

उत्तर प्रदेश के मऊ ज़िले के एक छोटे से गाँव मुबारकपुर (ब्लॉक-पोस्ट: रतनपुरा) में जन्मे वसीम अकरम कहानियों के साथ ही गीत, ग़ज़ल, नज़्म और स्क्रिप्ट भी लिखते हैं। विभिन्न विषयों पर चलने वाली उनकी कलम का एक अलग ही अंदाज़ है। उनका पहला उपन्यास ‘चिरकुट दास चिन्गारी’ ग्रामीण पृष्ठभूमि में रचा-बसा था तो वहीं ऑडिबल ओरिजिनल पर आई उनकी ऑडियो सीरीज ‘डायरी’ यौन शोषण की शिकार एक शहरी लड़की की कहानी थी। नैन बंजारे अनेक रंग-रूपों में सजी दस कहानियों का एक ख़ूबसूरत गुलदस्ता है।