Skip to content
maut ka vilap
(2 customer review)

179 (-10%)

Age Recommendation: Above 16 Years
ISBN: 978-93-92829-09-3 SKU: SV1573 Category:

Free Shipping for SV Prime Members

Estimated Dispatch: November 28, 2022

Check Shipping Days & Cost //

2 reviews for मौत का विलाप

4.5
Based on 2 reviews
5 star
50
50%
4 star
50
50%
3 star
0%
2 star
0%
1 star
0%
  1. Avatar

    Abhishek Singh Rajawat (सहपाठी)

    पाठक साहब के उपन्यासों के रीप्रिंट तो आसनी से उपलब्ध हैं पर छोटी – छोटी कहानियो को लेकर आया ये एडिशन कोलेक्टेर्स के लिए अनमोल उपहार है

    (1) (0)
  2. Avatar

    सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’ (store manager)

    wonderful story collection

    (4) (1)

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.

Cancel

More Info

मौत का विलाप- एक अरसे से अप्रकाशित कहानियों का संग्रह! सुरेन्द्र मोहन पाठक की चमत्कारी लेखनी का एक और दस्तावेज!! साहित्य विमर्श का गौरवशाली प्रकाशन!!!

कलाकारों के उस इलाके में आधी रात को एक चीख यूँ गूँजी जैसे मौत विलाप कर रही हो। आवाज़ जनाना थी और दहशत, खौफ और दर्द से लबरेज़ थी। जिस किसी ने भी चीख सुनी, वो यही समझा कि ड्रग्स की सारी रात चलने वाली किसी पार्टी में शायद किसी युवती का ब्वायफ्रेंड नशे में आपे से बाहर हो गया था और अब नशेड़ी से बलात्कारी बनने पर आमादा था।

Maut Ka Vilap- Stories by Surendra Mohan Pathak

  1. मौत का विलाप
  2. घड़ी की गवाही
  3. 57 साल पुराना आदमी
  4. आँख का तारा
  5. मौत का साया
  6. ताश के पत्ते
  7. ट्रेन में लाश
  8. नैकलेस की चोरी
  9. जुर्म का इकबाल
सुरेन्द्र मोहन पाठक का जन्म 19 फरवरी, 1940 को पंजाब के खेमकरण में हुआ था। विज्ञान में स्नातकोत्तर उपा‌धि हासिल करने के बाद उन्होंने भारतीय दूरभाष उद्योग में नौकरी कर ली। युवावस्‍था तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लेखकों को पढ़ने के साथ उन्होंने मारियो पूजो और जेम्स हेडली चेज़ के उपन्यासों का अनुवाद शुरू किया। इसके बाद मौलिक लेखन करने लगे। सन 1959 में, आपकी अपनी कृति, प्रथम कहानी “57 साल पुराना आदमी” मनोहर कहानियां नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई। आपका पहला उपन्यास “पुराने गुनाह नए गुनाहगार”, सन 1963 में “नीलम जासूस” नामक पत्रिका में छपा था। सुरेन्द्र मोहन पाठक के प्रसिद्ध उपन्यास असफल अभियान और खाली वार थे, जिन्होंने पाठक जी को प्रसिद्धि के सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचा दिया। इसके पश्‍चात उन्होंने अभी तक पीछे मुड़ कर नहीं देखा। उनका पैंसठ लाख की डकैती नामक उपन्यास अंग्रेज़ी में भी छपा और उसकी लाखों प्रतियाँ बिकने की ख़बर चर्चा में रही। उनकी अब तक 305 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उनका विमल सिरीज़ का नवीनतम उपन्यास ‘गैंग ऑफ फोर’ प्रकाशन की राह पर है। उन पर अन्य जानकारी के लिये www.smpathak.com पर लॉग ऑन करें। उनसे smpmysterywriter@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है। पत्राचार के लिये उनका पता है : पोस्ट बॉक्स नम्बर 9426, दिल्ली – 110051.
https://www.sahityavimarsh.in/?r3d=%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%aa-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%b6