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kachahari nama
प्रकाशक: सन्मति प्रकाशन
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ISBN: 978-9390539505 SKU: SP2518 Category:

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समीक्षा किताब की किताब : कचहरीनामा लेखक : मनीष भार्गव प्रकाशक : सन्मति पब्लिकेशन पेज : 126 बहुत कम ऐसे लेखक हैं मेरी लिस्ट में जिनकी किताब को पढ़ने का इंतजार किया है। मनीष भार्गव उनमें से एक हैं। इनकी पहली किताब " बेरंग लिफाफा " पढ़कर ही इनकी लेखनी का मुरीद हो गया था। पिछले कुछ महीनों में कई बार इनको डायरेक्ट मैसेज कर के पूछ लिया था कि सर अगली किताब कब आ रही है। कचहरीनामा एक कहानी संग्रह के रूप में है जिसका कवर पेज ही पाठकों का ध्यान आकर्षित करने में सक्षम है। इस किताब में जो कहानियां हैं वो कोई काल्पनिक कहानी नहीं है बल्कि हमारे देश के सरकारी सिस्टम का आइना है। सरकारी सिस्टम में काम करने वाले लेखक के बहुत सारे अनुभव इस किताब के माध्यम से बाहर आए हैं। किताब पढ़कर लगता है इस सरकारी सिस्टम में जो भी खामी है जिसका जिक्र लेखक ने अलग अलग कहानियों के माध्यम से किया है उस खामी के जिम्मेदार हम भी है । आठ कहानियों की इस किताब ने मुझे कहानी " सफर ( सीमा के आर पार ) बहुत मार्मिक लगी । इस कहानी में देश के बटवारे कर समय पाकिस्तान से भारत आए एक बुजुर्ग की कहानी है जो कि तब से लेकर अब तक के समय को बहुत सुंदर ढंग से दर्शाती है। एक और कहानी " रिटायरमेंट " मुझे बहुत अच्छी लगी । सरकारी सिस्टम में काम करने वाले सभी लोगों को यह कहानी जरूर पढ़नी चाहिए । पद के घमंड में चूर लोग जब रिटायर होते हैं तो क्या होता है इसका वर्णन बखूबी किया गया है। एक अन्य कहानी " सीमांकन " में इस देश के गांव और यहां के तहसील से जुड़े मुद्दे पढ़कर अपने आप में झांकने का मौका मिलता है। अन्य सभी कहानियां भी देश से जुड़े जरूरी मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने में सफल हुए है। किताब पढ़ते हुए कुछ पंक्तियां जो अच्छी लगी जैसे - 1. घर रहने वालों से ही बनता है दीवारों से नहीं। 2. एक बाप की अंतिम इच्छा भी उसके बेटे की सुरक्षा होती है। 3. सच सुनने से अंहकार को ठेस जल्दी पहुंचती है। हिंदी के पाठकों से अनुरोध है कि " कचहरीनामा " जरूर पढ़ें। देश के किसी भी सरकारी सिस्टम में काम कर रहे लोगों को यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए जिससे की आपको अपनी कार्य शैली समझने और बदलने में मदद मिले । किताब amazon और flipkart पर आ गई है। धन्यवाद। - अनुराग वत्सल ( नई वाली हिंदी )

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    समीक्षा किताब की

    किताब : कचहरीनामा
    लेखक : मनीष भार्गव
    प्रकाशक : सन्मति पब्लिकेशन
    पेज : 126

    बहुत कम ऐसे लेखक हैं मेरी लिस्ट में जिनकी किताब को पढ़ने का इंतजार किया है। मनीष भार्गव उनमें से एक हैं। इनकी पहली किताब ” बेरंग लिफाफा ” पढ़कर ही इनकी लेखनी का मुरीद हो गया था। पिछले कुछ महीनों में कई बार इनको डायरेक्ट मैसेज कर के पूछ लिया था कि सर अगली किताब कब आ रही है।
    कचहरीनामा एक कहानी संग्रह के रूप में है जिसका कवर पेज ही पाठकों का ध्यान आकर्षित करने में सक्षम है। इस किताब में जो कहानियां हैं वो कोई काल्पनिक कहानी नहीं है बल्कि हमारे देश के सरकारी सिस्टम का आइना है। सरकारी सिस्टम में काम करने वाले लेखक के बहुत सारे अनुभव इस किताब के माध्यम से बाहर आए हैं। किताब पढ़कर लगता है इस सरकारी सिस्टम में जो भी खामी है जिसका जिक्र लेखक ने अलग अलग कहानियों के माध्यम से किया है उस खामी के जिम्मेदार हम भी है । आठ कहानियों की इस किताब ने मुझे कहानी ” सफर ( सीमा के आर पार ) बहुत मार्मिक लगी । इस कहानी में देश के बटवारे कर समय पाकिस्तान से भारत आए एक बुजुर्ग की कहानी है जो कि तब से लेकर अब तक के समय को बहुत सुंदर ढंग से दर्शाती है। एक और कहानी ” रिटायरमेंट ” मुझे बहुत अच्छी लगी । सरकारी सिस्टम में काम करने वाले सभी लोगों को यह कहानी जरूर पढ़नी चाहिए । पद के घमंड में चूर लोग जब रिटायर होते हैं तो क्या होता है इसका वर्णन बखूबी किया गया है। एक अन्य कहानी ” सीमांकन ” में इस देश के गांव और यहां के तहसील से जुड़े मुद्दे पढ़कर अपने आप में झांकने का मौका मिलता है। अन्य सभी कहानियां भी देश से जुड़े जरूरी मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने में सफल हुए है। किताब पढ़ते हुए कुछ पंक्तियां जो अच्छी लगी जैसे –

    1. घर रहने वालों से ही बनता है दीवारों से नहीं।

    2. एक बाप की अंतिम इच्छा भी उसके बेटे की सुरक्षा होती है।

    3. सच सुनने से अंहकार को ठेस जल्दी पहुंचती है।

    हिंदी के पाठकों से अनुरोध है कि ” कचहरीनामा ” जरूर पढ़ें। देश के किसी भी सरकारी सिस्टम में काम कर रहे लोगों को यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए जिससे की आपको अपनी कार्य शैली समझने और बदलने में मदद मिले । किताब amazon और flipkart पर आ गई है। धन्यवाद।

    – अनुराग वत्सल
    ( नई वाली हिंदी )

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’Kachahari nama’, सरकारी कार्यालय व जीवन के आम अनुभवों पर आधारित है, जिसे पढ़कर आप अपने आसपास की घटनाओं को सिर्फ देखेंगे ही नहीं बल्कि जिएँगे भी।

मनीष भार्गव का जन्म मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की नरवर तहसील के ग्राम पंचायत सोन्हर में एक कृषक परिवार में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय पनघटा (नरवर) जिला-शिवपुरी से हुई।

Book Details

Weight 240 g
Dimensions 13 × 1.2 × 20 cm
Pages:   128

’Kachahari nama’, सरकारी कार्यालय व जीवन के आम अनुभवों पर आधारित है, जिसे पढ़कर आप अपने आसपास की घटनाओं को सिर्फ देखेंगे ही नहीं बल्कि जिएँगे भी।

मनीष भार्गव का जन्म मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की नरवर तहसील के ग्राम पंचायत सोन्हर में एक कृषक परिवार में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय पनघटा (नरवर) जिला-शिवपुरी से हुई। इन्होंने जीवाजी विश्विद्यालय, ग्वालियर से गणित व शिक्षाशास्त्र में स्नातक तथा इतिहास, अर्थशास्त्र व कंप्यूटर से परास्नातक की उपाधि हासिल की। इसके बाद इन्होंने मध्यप्रदेश शासन के कई विभागों में अलग अलग पदों पर रहकर 5 वर्ष से अधिक अपनी सेवाएँ दीं तथा वर्तमान में दिल्ली सरकार में शिक्षक परामर्शदाता के पद पर कार्यरत हैं। इनका चर्चित उपन्यास ’बेरंग लिफ़ाफ़े’ जहाँ इनके जीवन के विद्यार्थी जीवन व प्रशासनिक संघर्षों की कहानी थी तो वहीं दूसरा उपन्यास ’नल दमयंती सतयुग की अमर गाथा’ पौराणिक कथा थी। यह किताब ’कचहरीनामा’, सरकारी कार्यालय व जीवन के आम अनुभवों पर आधारित है, जिसे पढ़कर आप अपने आसपास की घटनाओं को सिर्फ देखेंगे ही नहीं बल्कि जिएँगे भी। यह ’वोकल’ एवं ’बोलकर’ जैसे कई डिजिटल प्लेटफार्म पर एक प्रेरक वक़्ता के रूप में लोगों को मार्गदर्शन करते हैं, जहाँ इन्हें 4 करोड़ से ज्यादा बार सुना गया है।