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इनरलाइन पास
प्रकाशक: हिन्द युग्म प्रकाशन
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Age Recommendation: Above 12 Years
ISBN: 9789384419561 SKU: HY2333 Category:

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    anurag.eib

    रोचक किताब

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एक दुनिया जो हमारे इर्द-गिर्द होती है, जहाँ हम रहते हैं, हमारे कम्फ़र्ट ज़ोन की दुनिया और एक दुनिया उससे कहीं दूर- हमारे सपनों की दुनिया। लेकिन उस दूसरी दुनिया तक पहुँचना इतना आसान नहीं होता।

वहाँ पहुँचने के लिए कुछ सीमाएँ लाँघनी पड़ती हैं,पार करने होते हैं मुश्किलों के कुछ दरकते हुए पहाड़।और कभी-कभी जान तक मुश्किल में डालनी पड़ती है। शायद इसलिए हममें से ज़्यादातर लोग वहाँ जाने से बचते हैं।

सुविधाओं की सीमारेखा के पार मन के उन प्रतिबंधित इलाक़ों में पहुँचने के लिए हम सभी कोपार करनी होती एक लाइन, इनर लाइन और खोजना होता है अपना-अपना इनर लाइन पास। उमेश पंत का यात्रा-वृतांत ‘इनरलाइन पास’ एक ऐसी ही यात्रा की कहानी है जो बाहर की दुनिया के साथ-साथ मन के भीतर भी चलती है।

18 दिनों में पूरी हुई इस क़रीब 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा के रोमांचक अनुभवों का एक गुलदस्ता है ‘इनरलाइन पास’ जो आपको ख़ूबसूरती और जोख़िमों के एकदम चरम तक लेकर जाता है

Book Details

Weight 200 g
Dimensions 13 × 1 × 20 cm
Pages:   160

18 दिनों में पूरी हुई इस क़रीब 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा के रोमांचक अनुभवों का एक गुलदस्ता है ‘इनरलाइन पास’ जो आपको ख़ूबसूरती और जोख़िमों के एकदम चरम तक लेकर जाता है।

उत्तराखंड के गंगोलीहाट (पिथौरागढ़) से ताल्लुक़ रखने वाले उमेश पंत ने पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के मास कम्यूनिकेशन रिसर्च सेंटर से मास कम्यूनिकेशन में एम.ए. किया। फिर मुंबई जाकर बालाजी टेलीफ़िल्म्स में बतौर एसोसिएट राइटर काम किया। आगे नीलेश मिसरा से जुड़कर बिग एफ़एम पर प्रसारित होनेवाले उनके मशहूर क़िस्सागोई के कार्यक्रम के लिए कहानियाँ लिखते रहे। ग्रामीण समाचार-पत्र ‘गाँव कनेक्शन’ में बतौर रोविंग राइटर भी जुड़े। हिंदी के तमाम अख़बारों में लगातार लेख भी लिखते रहे। 'गुल्लक' नाम की एक वेबसाइट भी चलाते हैं। शौकिया घुमक्कड़ हैं साथ में फ़ोटोग्राफ़ी भी करते हैं। फ़िलवक़्त कॉन्टेंट प्रोजेक्ट के साथ जुड़कर 'सावन' और 'रेड एफ़एम' के लिए कहानियाँ लिख रहे हैं