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फरेब का सफ़र
प्रकाशक: सन्मति प्रकाशन
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Age Recommendation: Above 12 Years
ISBN: 978-9390539451 SKU: SM2312 Category:

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    anurag.eib

    आज के समय की किताब

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फरेब का सफ़र – डिजिटल दौर में आपकी प्राइवेसी में दखल देकर कोई कैसे आपकी ज़िंदगी को प्रभावित कर सकता है, उसी की कहानी है।

एक मेट्रो शहर की ऐसी कहानी जहाँ स्टार्टअप, पब कल्चर, डेटिंग, ओपन रिलेशनशिप की दुनिया है लेकिन यहाँ एक ऐसा शातिर इंसान है जिसने सबकी ज़िन्दगी को अपने मन-मुताबिक घुमाया, नचाया, और इस तरीके से इस्तेमाल किया कि सब एक दूसरे के लिए फरेबी बन गए।

आपके करीब भी एक ऐसी चीज़ है जो आप पर हरपल नज़र रखे हुए है और आपकी हर जानकारी को कहीं इस्तेमाल कर रही है । पढ़िए “फ़रेब का सफ़र” और पहचानिए वो कौन है । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सहारे प्राइवेसी में दखल देने की थीम पर लिखा हुआ हिंदी का पहला उपन्यास है फरेब का सफ़र

Book Details

Weight 200 g
Dimensions 12.7 × .79 × 20.3 cm
Pages:   128

डिजिटल दौर में आपकी प्राइवेसी में दखल देकर कोई कैसे आपकी ज़िंदगी को प्रभावित कर सकता है, उसी की कहानी है ।

एक मेट्रो शहर की ऐसी कहानी जहाँ स्टार्टअप, पब कल्चर, डेटिंग, ओपन रिलेशनशिप की दुनिया है लेकिन यहाँ एक ऐसा शातिर इंसान है जिसने सबकी ज़िन्दगी को अपने मन-मुताबिक घुमाया, नचाया, और इस तरीके से इस्तेमाल किया कि सब एक दूसरे के लिए फरेबी बन गए ।

आपके करीब भी एक ऐसी चीज़ है जो आप पर हरपल नज़र रखे हुए है और आपकी हर जानकारी को कहीं इस्तेमाल कर रही है ।

पढ़िए “फ़रेब का सफ़र” और पहचानिए वो कौन है । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सहारे प्राइवेसी में दखल देने की थीम पर लिखा हुआ हिंदी का पहला उपन्यास है फ़रेब का सफ़र

छोटे शहरों की गलियों से निकलते हैं कुछ सपने जिन्हें पंखों की नहीं, शब्दों की ज़रूरत होती है जो पन्नों पर बिखरते हैं और हर पढ़ने वाले के ख़यालों में उड़ते रहते हैं। अभिलेख उन्हीं में से एक हैं। कलकत्ता में जन्मे और आसनसोल, दुर्गापुर, धनबाद जैसे शहरों में पले-बढे और पढ़े-लिखे। फिर लखनऊ से रोज़ी-रोटी की शुरुआत की। 10 साल के रिटेल सेल्स से निकलकर अब रेडियो लिए लिखते हैं। लखनऊ के रहने वाले हैं और घूमने के शौक़ीन भी। साहित्यिक सम्मान से लेकर प्रोफेशनल अवार्ड्स भी मिले हैं। माइक्रो ब्लॉग्गिंग साइट के अलावा फेसबुक, इंस्टा पर भी खासा एक्टिव हैं