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दुर्गापुर जंक्शन
प्रकाशक: Blue Emerald प्रकाशन
(1 customer review)

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Age Recommendation: Above 15 Years
ISBN: 978-8195604319 SKU: BE2317 Category:

10

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1 review for दुर्गापुर जंक्शन

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    anurag.eib

    स्कूल की यादें ताजा हो गई

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पश्चिम बंगाल के पश्चिमी बर्धमान जिले के अंतर्गत दुर्गापुर एक सुनियोजित और खूबसूरत शहर है। इस शहर के इतिहास पर प्रकाश डालें तो पता चलता है कि शहरी बसावट से पहले यहां का अधिकांश क्षेत्र घने जंगलों का घर हुआ करता था।

शहरीकरण की प्रक्रिया के बाद भी यह शहर आज भी प्रकृति के काफी नजदीक है। सुनियोजित तरीके से बसाए गए दुर्गापुर शहर को लेखक अभिलाष दत्ता ने अपने नजर से देखा और उस शहर को जिया है। प्रकृति पसंद अभिलाष ने छः दोस्तों की कहानी का सहारा लेकर दुर्गापुर की सुंदरता को पाठकों के सामने रखा है। यह किताब दुर्गापुर के सम्मान में लिखा गया है।

पश्चिम बंगाल के पश्चिमी बर्धमान जिले के अंतर्गत दुर्गापुर एक सुनियोजित और खूबसूरत शहर है।

इस शहर के इतिहास पर प्रकाश डालें तो पता चलता है कि शहरी बसावट से पहले यहां का अधिकांश क्षेत्र घने जंगलों का घर हुआ करता था।

शहरीकरण की प्रक्रिया के बाद भी यह शहर आज भी प्रकृति के काफी नजदीक है।

सुनियोजित तरीके से बसाए गए दुर्गापुर शहर को लेखक अभिलाष दत्ता ने अपने नजर से देखा और उस शहर को जिया है। प्रकृति पसंद अभिलाष ने छः दोस्तों की कहानी का सहारा लेकर दुर्गापुर की सुंदरता को पाठकों के सामने रखा है। यह किताब दुर्गापुर के सम्मान में लिखा गया है।

साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार द्वारा शीर्ष सूची में चयनित अभिलाष दत्ता मानापट्टी, मधुबनी (मिथिला) के रहने वाले हैं। लेकिन उनका जन्म पटना में हुआ। पटना से स्कूली शिक्षा लेने के बाद पैरामेडिकल की पढ़ाई करने धनबाद और दुर्गापुर गए। पढ़ाई बीच में ही छोड़ पटना वापस आ गए। पटना आने के बाद उन्होंने राजनीति शास्त्र और पत्रकारिता से स्नातक किया। पेशे से शिक्षक और पार्ट टाइम पत्रकार व लेखक हैं। साल 2021 में साहित्य अकादमी के युवा पुरस्कार श्रेणी में इनकी पुस्तक ‘अवतार - महारक्षकों का आगमन' चयनित हुई। लिखने का गुण अपने दादाजी से विरासत में लिए अभिलाष दत्ता एक कहानी संग्रह और दो उपन्यास लिख चुके हैं। लेखन के अलावे वह सिनेमा में रूचि रखते हैं, मोक्ष नाम से एक डॉक्युमेंट्री भी बना चुके हैं। पटना में ‘पाटलिपुत्रा सिने सोसाइटी’ के सह-संयोजक और साहित्यक संस्था ‘लेख्य-मंजूषा’ के उप-सचिव हैं।