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December Sanjog
प्रकाशक: सन्मति प्रकाशन
(1 customer review)

120 (-25%)

Age Recommendation: Above 14 Years
ISBN: 978-9390539710 SKU: SP2517 Category:

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1 review for December Sanjog | दिसम्बर संजोग

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    anurag.eib

    समीक्षा किताब की

    क़िताब – दिसंबर संजोग
    लेखिका -आभा श्रीवास्तव
    प्रकाशक – सन्मति प्रकाशन
    पेज -148
    मूल्य -160

    बहुत कम किताब ऐसी पढ़ी है अब तक जिसको पढ़ते हुए लगता है कि इस किताब की कहानी कभी खत्म न हो। दिसंबर संजोग खत्म हुई तो लगा कि और पढ़ें। कहानी संग्रह होने की वजह से हर कहानी के बाद थोड़ा रुकने का समय मिलता है लेकिन इस किताब की कहानी खत्म होने के साथ ही आपको कहानी के भाव में ठहरा देती है। कहानी पूरी होने के बाद भी पाठक थोड़ी देर के लिए कहानी में ही रह जाते हैं।
    कई बार लगता है कि इतनी गहराई की बातें इतनी आसान भाषा में पढ़ना एक सुखद अनुभव ही तो है।
    दस कहानी संग्रहों की यह किताब पढ़ने में 4 से 5 घण्टे काफी हैं। कहानियों की रफ्तार बहुत शानदार है। रिश्ते और भाव से जुड़ी कहानी कई बार थोड़ी डराती भी हैं और सिहरन भी पैदा करती हैं। कहानी ” निरुत्त्तर ” पढ़ना और समझना इस सामाजिक परिवेश में बहुत जरूरी है जहां आज भी लड़कियों का जीवन दहेज प्रथा के चलते बर्बाद हो रहा है वैसे में लेखिका ने इस कहानी के माध्यम से एक तरह से समाज को जागरूक करने का भी काम किया है। कहानी ” अलविदा अम्मा ” में एक बेटी और मां के बीच आजीवन चले द्वंद को बहुत ही सुंदर शब्दावली में लिखा गया है। बाकी कहानियां भी पढ़ते हुए आपके दिमाग में छाप छोड़ने का माद्दा रखती है। किताब की कुछ पक्तियां जो बहुत पसंद आई जैसे –
    1. कटु होता है सच को स्वीकार करना और फिर उसी के साथ जीना।
    2. जीवन में जितनी बातें कही जाती हैं उससे कहीं अधिक अनकही रह जाती हैं।
    3. समय मौसम और उम्र कहाँ रुकते हैं किसी के लिए। फिसल जाते हैं मुट्ठी से रेत की तरह।

    कुल मिलाकर आभा जी अपनी पहली कहानी संग्रह ” काली बकसिया ” के बाद ” दिसम्बर संजोग ” में भी अपनी सरल शब्दावली से स्त्री मन की गहराइयों की कहानी लिखने में सफल हुई हैं। इस किताब के बाद उनकी तरफ से और भी ऐसी ही कहानियों का इंतजार रहेगा। किताब amaozn पर उपलब्ध है। जरूर पढ़ें। धन्यवाद।

    – अनुराग वत्सल
    ( नई वाली हिन्दी)

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December Sanjog – प्रस्तुत संग्रह में प्यार के ताने-बानों के साथ जीवन की कड़वी मीठी सच्चाइयाँ भी अनायास ही बुनी गई हैं। जीवन के मिले-जुले अनुभवों को, शब्दों के जाल में समेट लेना, संजो लेना, मन को कहीं न कहीं तसल्ली देता है।

“आखर ढाई” एक ऐसी युवती की कहानी है जो सच्चे प्रेम की तलाश में आजीवन भटकती रहती है। अंततः उसे उसका सच्चा प्यार मिलता है लेकिन क्या सच में ये उसका अंतिम प्यार है?

ऐसे ही December Sanjog की एक कहानी – “उस रात की बात” का कथानक सिहरन पैदा करने वाला है, तब भी रत्ती बुआ की कहानी एक सत्य घटना से प्रेरित है। “पंखुरी-पंखुरी हरसिंगार” की कमसिन-कोमलांगी नायिका समय और परिस्थितियों के साथ एक सशक्त स्त्री बनती है और अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम रहती

Book Details

Weight 240 g
Dimensions 13 × 1.2 × 20 cm
Pages:   148

December Sanjog – प्रस्तुत संग्रह में प्यार के ताने-बानों के साथ जीवन की कड़वी मीठी सच्चाइयाँ भी अनायास ही बुनी गई हैं। जीवन के मिले-जुले अनुभवों को, शब्दों के जाल में समेट लेना, संजो लेना, मन को कहीं न कहीं तसल्ली देता है।

“आखर ढाई” एक ऐसी युवती की कहानी है जो सच्चे प्रेम की तलाश में आजीवन भटकती रहती है। अंततः उसे उसका सच्चा प्यार मिलता है लेकिन क्या सच में ये उसका अंतिम प्यार है?

ऐसे ही “उस रात की बात” का कथानक सिहरन पैदा करने वाला है, तब भी रत्ती बुआ की कहानी एक सत्य घटना से प्रेरित है। “पंखुरी-पंखुरी हरसिंगार” की कमसिन-कोमलांगी नायिका समय और परिस्थितियों के साथ एक सशक्त स्त्री बनती है और अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम रहती

आभा श्रीवास्तव का जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में हुआ। लखनऊ विश्वविद्यालय से दर्शन शास्त्र में एम.ए. और बी.लिब. किया। पिता, कालांतर में पति के शासकीय नौकरी में होने के कारण उत्तर प्रदेश (अविभाजित) के विभिन्न शहरों में रहने के साथ-साथ, देश के विविध स्थानों का भ्रमण एवं प्रवास करने का सौभाग्य प्राप्त होता रहा, जिससे स्थान विशेष की सांस्कृतिक, सामाजिक समृद्धता को निकट से देखने और समझने का अवसर मिला। इन स्थानों की सामाजिक/सांस्कृतिक विविधताओं की झलक इनकी कहानियों में देखी जा सकती है। छोटी उम्र में जब अधिकांश हमउम्र बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते, इन्होंने पुस्तकों को अपना साथी बनाया। मात्र दस वर्ष की आयु में प्रदेश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्र में अपनी प्रथम रचना, कविता के रूप में प्रकाशन के साथ, अपनी साहित्यिक यात्रा की शुरुआत की जो अब तक जारी है। पुस्तक के रूप में अब तक बाल काव्य संग्रह “रिमझिम पड़ी फुहार” तथा लोकप्रिय कहानी संग्रह “काली बकसिया” प्रकाशित हो चुकी हैं।