Skip to content

549 या अधिक की खरीद पर डिलीवरी फ्री

449 या अधिक की खरीद पर कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प उपलब्ध (COD Charges: INR 50)
बनकिस्सा
प्रकाशक: हिंदयुग्म प्रकाशन
(1 customer review)

165 (-34%)

ISBN: 978-9387464346 SKU: HY1825 Category:

Free Shipping for SV Prime Members

Estimated Dispatch: November 28, 2022

Check Shipping Days & Cost //

1 review for बनकिस्सा-स्टोरीज ऑफ किंगफिशर

4.0
Based on 1 review
5 star
0%
4 star
100
100%
3 star
0%
2 star
0%
1 star
0%
  1. Avatar

    Abhishek Singh Rajawat

    बात बनेचर की पहली कड़ी ‘ बनकिस्सा ‘ अपने आप में एक अलग और अनोखा प्रयोग है साहित्य की दुनिया में, नए लेखकों को मनोरंजन के साथ-साथ ऐसी ही सीख देती हुयी किताब लिखने के लिए सुनील जी से प्रेरणा लेनी चाहिए…

    (0) (0)

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.

Cancel

Book Details

Weight 160 g
Dimensions 12.9 × 1.5 × 19.8 cm
Pages:   248

बनकिस्सा – किस्सा उस सोच से लेकर जिसने तुम्हें मानव बना दिया,
उस षड्यंत्र तक का जिसने तुम्हें भगवान् बनने से रोक दिया।
मैं किंगफ़िशर हूँ, मेरे किस्से सुनोगे। किस्सा जंगल का, झील का, बादलों का और उनके बीच रहनेवाले अद्भुत् जीवों का। किस्सा हिंसक बाघ में छिपे शिष्टता का और डरपोक चूहे में व्याप्त साहस का। किस्सा बच्चे जननेवाले नरों का, दयालु जोंबियो का, मूल्यहीन दोगलों का। किस्सा उदार की अवहेलना का, उदंड की आराधना का। किस्सा शक्तिविहीन अधिकारों का, अभिशापयुक्त ताकत का। किस्सा तुम्हारे बंधकर मुक्ति पानेवाले जीवन का, किस्सा तुम्हें एकलौती पहचान देनेवाले मरण का। किस्सा नवविचारों के अंतिम हस्र का, किस्सा समाधानों से शुरू दुश्चक्र का। किस्सा मनुष्यता से अच्छी पशुता का और प्रजातंत्र से श्रेष्ठ अराजकता का। किस्सा उस सोच का जिसने तुम्हें बंदर से मानव बना दिया, किस्सा उस षड्यंत्र का जिसने तुम्हें भगवान् बनने से रोक दिया।”
जिनकी विलक्षणता किवदंती बनने की योग्यता रखती हो,
जिनको जानना भर रोमांच के लिए पर्याप्त हो,
वे आए हैं किस्सों के पात्र बनकर विश्व के इतिहास में पहलेपहल,
सुनाने कुछ ऐसा,
जिसे कहना सिर्फ उन्हें बदा है और सुनना सिर्फ हमें।”

सुनील कुमार ‘सिंक्रेटिक’ मूल रूप से भोजपुर, बिहार के रहनेवाले। वर्तमान में राज्य सरकार में पदाधिकारी। बचपन से जीव-जंतुओं, वन्य प्राणियों में रुचि रही। वर्तमान हिन्दी में अपनी विधा के एक मात्र लेखक हैं। सब किस्सा लिखते हैं, ये बन किस्सा। इनकी प्रसिद्धि इंसानी चरित्र के मुताबिक जानवरों को ढूंढकर ऐसी कहानी गढ़ने की है कि जंगल का सामान्य सा किस्सा, कब मनुष्य का जीवन-किस्सा बन जाता है, पता ही नहीं चलता। विजुअल मोड इनकी लेखनी की विशेष शैली है। पढ़ने के साथ कहानी आँखों के सामने घूमने लगती है। बनकिस्सा इनकी पहली किताब है जो पाठकों के बीच ‘मॉडर्न पंचतंत्र’ के रूप में विख्यात है।