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बाग़ी बलिया-baghi baliya
प्रकाशक: हिंदयुग्म प्रकाशन
(1 customer review)

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Age Recommendation: Above 16 Years
ISBN: 978-9387464704 SKU: HY1861 Category:

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1 review for बाग़ी बलिया

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    Abhishek Singh Rajawat

    84 को पढने के बाद लेखक से मुझे जो भी शिकायत हुयी थी, बागिओ बलिया ने उसकी भरपाई कर दी, कहानी में इतनी स्पीड कि आप एक बार पढ़ना शूरू करें तो खत्म, करके ही रुकें

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Book Details

Weight 190 g
Dimensions 2 × 0.1 × 1.3 cm
Pages:   256

बाग़ी बलिया- संजय को स्टूडेंट यूनियन का इलेक्शन जीतना है और रफ़ीक़ को उज़्मा का दिल।
झुन्नू भइया के आशीर्वाद बिना कोई प्रत्याशी पिछले दस सालों से चुनाव नहीं जीता और झुन्नू भइया का आशीर्वाद संजय के साथ नहीं है।
शहर की खोजी निगाहों के बीच ही रफ़ीक़ को उज़्मा से मिलना है और शहर प्रेमियों पर मेहरबान नहीं है।
डॉक साब कौन हैं जो कहते हैं कि संजय मरहट्टा है और इस मरहट्टे का जन्म राज करने को नहीं राजनीति करने को हुआ है?
शहर बलिया, जो देने पर आए तो तीनों लोक दान कर देता है और लेने पर उतारू हो तो…
हँसते-हँसते रो देना चाहते हों तो पढ़ें—बाग़ी बलिया…

अस्सी के दशक में बूढ़े हुए। नब्बे के दशक में जवान। इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में बचपना गुजरा और कहते हैं कि नई सदी के दूसरे दशक में पैदा हुए हैं। अब जब पैदा ही हुए हैं तो खूब उत्पात मचा रहे हैं। चाहते हैं कि उन्हें कॉस्मोपॉलिटन कहा जाए। हालाँकि देश से बाहर बस भूटान गए हैं। पूछने पर बता नहीं पाते कि कहाँ के हैं। उत्तर प्रदेश से जड़ें जुड़ी हैं। २० साल तक जब खुद को बिहारी कहने का सुख लिया तो अचानक ही बताया गया कि अब तुम झारखंडी हो। उसमें भी खुश हैं। खुद जियो औरों को भी जीने दो के धर्म में विश्वास करते हैं और एक साथ कई-कई चीजें लिखते हैं। अंतर्मुखी हैं इसलिए फोन की जगह ईमेल पर ज्यादा मिलते हैं। ब्लॉगिंग, कविता और फिल्मों के रुचि रखने वाले सत्य व्यास फ़िलहाल दो फिल्मों की पटकथा लिख रहे हैं। पहले दोनों उपन्यास बनारस टॉकीज और दिल्ली दरबार 'दैनिक जागरण-नीलशन बेस्टसेलर' की सूची में शामिल रहे हैं। तीसरे उपन्यास चौरासी पर ग्रहण के नाम से वेब सीरीज भी बनी। बाग़ी बलिया इनका चौथा उपन्यास है। ईमेल : authorsatya@gmail.com