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अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार
प्रकाशक: हिन्द युग्म प्रकाशन
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Age Recommendation: Above 12 Years
ISBN: 9789387464155 SKU: HY2334 Category:

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अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार – कुल नौ कहानियों का यह संग्रह अपने आप में स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिल सच्चाइयों को समेटे हुए है। ये फँतासियों और नाटकीयता से बहुत दूर अवसाद और कुंठाओं की सहज कहानियाँ हैं।

यहाँ आपको पारंपरिक वर्जनाओं और उनसे उपजे अंतर्द्वंद से जूझते ऐसे बहुत से किरदार मिलेंगे जिन पर बंधनों को तोड़ देने का फ़ितूर है और उन्हें तोड़ देने का मलाल भी। ये सभी कहानियाँ एक-दूसरे से बिल्कुल जुदा हैं। कहानियों की भाषा सरस और प्रवाहमयी है।

कहानीकारा ने बेबाक विषयों को बेहद शालीनता से बुना है। एकदम नए शिल्प और शैली की ये कहानियाँ अनायास ही पाठक के भीतर गहरे उतर जाती हैं। इन कहानियों का सबसे प्रबल पक्ष यह है कि सभी कहानियों में कहीं-न-कहीं आप ख़ुद से रू-ब-रू होंगे और कमज़ोरी यह कि ये कहानियाँ आपको बेचैन और बहुत बेचैन कर सकती हैं

Book Details

Weight 200 g
Dimensions 13 × 1 × 20 cm
Pages:   160

कुल नौ कहानियों का यह संग्रह अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार अपने आप में स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिल सच्चाइयों को समेटे हुए है। ये फँतासियों और नाटकीयता से बहुत दूर अवसाद और कुंठाओं की सहज कहानियाँ हैं।

यहाँ आपको पारंपरिक वर्जनाओं और उनसे उपजे अंतर्द्वंद से जूझते ऐसे बहुत से किरदार मिलेंगे जिन पर बंधनों को तोड़ देने का फ़ितूर है और उन्हें तोड़ देने का मलाल भी। ये सभी कहानियाँ एक-दूसरे से बिल्कुल जुदा हैं।

कहानियों की भाषा सरस और प्रवाहमयी है। कहानीकारा ने बेबाक विषयों को बेहद शालीनता से बुना है। एकदम नए शिल्प और शैली की ये कहानियाँ अनायास ही पाठक के भीतर गहरे उतर जाती हैं। इन कहानियों का सबसे प्रबल पक्ष यह है कि सभी कहानियों में कहीं-न-कहीं आप ख़ुद से रू-ब-रू होंगे और कमज़ोरी यह कि ये कहानियाँ आपको बेचैन और बहुत बेचैन कर सकती हैं

उत्तराखंड के गंगोलीहाट (पिथौरागढ़) से ताल्लुक़ रखने वाले उमेश पंत ने पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के मास कम्यूनिकेशन रिसर्च सेंटर से मास कम्यूनिकेशन में एम.ए. किया। फिर मुंबई जाकर बालाजी टेलीफ़िल्म्स में बतौर एसोसिएट राइटर काम किया। आगे नीलेश मिसरा से जुड़कर बिग एफ़एम पर प्रसारित होनेवाले उनके मशहूर क़िस्सागोई के कार्यक्रम के लिए कहानियाँ लिखते रहे। ग्रामीण समाचार-पत्र ‘गाँव कनेक्शन’ में बतौर रोविंग राइटर भी जुड़े। हिंदी के तमाम अख़बारों में लगातार लेख भी लिखते रहे। 'गुल्लक' नाम की एक वेबसाइट भी चलाते हैं। शौकिया घुमक्कड़ हैं साथ में फ़ोटोग्राफ़ी भी करते हैं। फ़िलवक़्त कॉन्टेंट प्रोजेक्ट के साथ जुड़कर 'सावन' और 'रेड एफ़एम' के लिए कहानियाँ लिख रहे हैं