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allahabad diary
प्रकाशक: हिन्द युग्म प्रकाशन

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Age Recommendation: Above 15 Years
ISBN: 978-9392820366 SKU: HY2479 Category:

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‘Allahabad Diary – एक ग़ैर मामूली दास्तान’

हिंदी माध्यम के छात्रों की संघर्ष गाथा है जो सिविल सेवा परीक्षा पास करके आईएएस बनना चाहते हैं। इसी कथा के समानांतर एक दूसरी कथा एक कम उम्र की विधवा शांति की है जिसका बेटा उसे छोड़कर विदेश चला जाता है।

वैधव्य की पीड़ा, पुत्र का देश छोड़कर चले जाना और अकेलेपन की त्रासदी के बीच यह नारी पात्र आज की पीढ़ी पर वर्तमान समाज के परिप्रेक्ष्य में कई मौलिक प्रश्न खड़े करता है।

कहानी पढ़ते समय यह आभास होता है कि यह कथा न केवल समाज में अपना स्थान बनाने की ख़्वाहिश रखने वाले कुछ नवयुवकों की है बल्कि इसमें दो परिस्थितिजन्य पीड़ा से ग्रसित महिलाओं की संघर्ष गाथा भी है।

अनुराग का संघर्ष कहानी में बारीकी से चित्रित किया गया है। इस पात्र का चरित्र उदात्त चरित्र नहीं है।

अपने जीवन के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए वह झूठ-फरेब सब करने को तैयार है। इसकी एक ही नैतिकता है- विजय, चाहे वह किसी के ध्वंस पर ही क्यों न हो। कहानी में हिंदी माध्यम के अन्य पात्र Allahabad (वर्तमान का प्रयागराज) के हिंदी माध्यम छात्र-जीवन को पूरी तरह संदर्भित करते हैं

इस परीक्षा में अँग्रेज़ी के प्रभाव और मातृभाषा के अपमान पर कई अनुत्तरित प्रश्न पर उठाते हैं।

उर्मिला का संघर्ष, शांति की पीड़ा, हिंदी माध्यम के छात्रों की अँग्रेज़ी न जानने की विवशता के मध्य एक संकल्प इन निम्न मध्यवर्गीय छात्रों का कि मैं जन्मा हूँ एक ग़ैर मामूली दास्तान के लिए, कथानक का केंद्र बिंदु है।

Allahabad University, यूनिवर्सिटी रोड, Allahabad के छोटे-छोटे मुहल्ले इस कथानक में दिखाए गए हैं।

कई पात्र इस कहानी के सजीव हैं जिनको आम जीवन से उठाया गया है। अगर ऐसा कहा जाए कि इस कहानी के पात्र कुछ अलग नाम और क़द-काठी के साथ आज भी Allahabad के छात्रावासों और डेलीगेसियों में साँसें ले रहे तो शायद यह अतिशयोक्ति न होगी।

यह भावना के धरातल पर लिखा गया उपन्यास है जिसमें भावनाएँ अक्सर प्रधान हो जाती हैं और पात्रों से अधिक पात्रों की भावनाएँ मस्तिष्क को प्रभावित करने लगती हैं।

Book Details

Weight 300 g
Dimensions 14 × 2 × 20 cm
Pages:   352

‘Allahabad Diary – एक ग़ैर मामूली दास्तान’

हिंदी माध्यम के छात्रों की संघर्ष गाथा है जो सिविल सेवा परीक्षा पास करके आईएएस बनना चाहते हैं। इसी कथा के समानांतर एक दूसरी कथा एक कम उम्र की विधवा शांति की है जिसका बेटा उसे छोड़कर विदेश चला जाता है।

वैधव्य की पीड़ा, पुत्र का देश छोड़कर चले जाना और अकेलेपन की त्रासदी के बीच यह नारी पात्र आज की पीढ़ी पर वर्तमान समाज के परिप्रेक्ष्य में कई मौलिक प्रश्न खड़े करता है।

कहानी पढ़ते समय यह आभास होता है कि यह कथा न केवल समाज में अपना स्थान बनाने की ख़्वाहिश रखने वाले कुछ नवयुवकों की है बल्कि इसमें दो परिस्थितिजन्य पीड़ा से ग्रसित महिलाओं की संघर्ष गाथा भी है।

अनुराग का संघर्ष कहानी में बारीकी से चित्रित किया गया है। इस पात्र का चरित्र उदात्त चरित्र नहीं है।

अपने जीवन के लक्ष्य तक पहुँचने के लिए वह झूठ-फरेब सब करने को तैयार है। इसकी एक ही नैतिकता है- विजय, चाहे वह किसी के ध्वंस पर ही क्यों न हो। कहानी में हिंदी माध्यम के अन्य पात्र Allahabad (वर्तमान का प्रयागराज) के हिंदी माध्यम छात्र-जीवन को पूरी तरह संदर्भित करते हैं

इस परीक्षा में अँग्रेज़ी के प्रभाव और मातृभाषा के अपमान पर कई अनुत्तरित प्रश्न पर उठाते हैं।

उर्मिला का संघर्ष, शांति की पीड़ा, हिंदी माध्यम के छात्रों की अँग्रेज़ी न जानने की विवशता के मध्य एक संकल्प इन निम्न मध्यवर्गीय छात्रों का कि मैं जन्मा हूँ एक ग़ैर मामूली दास्तान के लिए, कथानक का केंद्र बिंदु है।

Allahabad University, यूनिवर्सिटी रोड, Allahabad के छोटे-छोटे मुहल्ले इस कथानक में दिखाए गए हैं।

कई पात्र इस कहानी के सजीव हैं जिनको आम जीवन से उठाया गया है। अगर ऐसा कहा जाए कि इस कहानी के पात्र कुछ अलग नाम और क़द-काठी के साथ आज भी Allahabad के छात्रावासों और डेलीगेसियों में साँसें ले रहे तो शायद यह अतिशयोक्ति न होगी।

यह भावना के धरातल पर लिखा गया उपन्यास है जिसमें भावनाएँ अक्सर प्रधान हो जाती हैं और पात्रों से अधिक पात्रों की भावनाएँ मस्तिष्क को प्रभावित करने लगती हैं।

वीरेन्द्र ओझा भारतीय राजस्व सेवा के 1993 बैच के अधिकारी हैं जो वर्तमान में आयकर आयुक्त, अहमदाबाद के पद पर कार्यरत हैं। इनकी एक काव्य पुस्तक ‘कुछ शब्द मेरे’ प्रकाशित हो चुकी है। लंबी दौड़ की मैराथन स्पर्धाओं में भी इनकी रुचि है। इन्होंने देश-विदेश की कई मैराथन-अल्ट्रा मैराथन स्पर्धाओं में भागीदारी की है। इनकी महत्वपूर्ण मैराथन धावन में, 89 किमी की कठिन पहाड़ियों वाली कॉमरेड अल्ट्रा मैराथन एवं आयकर विभाग के स्वच्छ धन अभियान को प्रोत्साहित करने के लिए 101 किलोमीटर की गुवाहाटी-शिलांग मैराथन, शामिल हैं। ये ‘पथ-ज्योति’ के नाम से एक अभियान चलाते हैं जिसमें छात्रों को सिविल सेवा परीक्षा के लिए निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। इनका एक यूट्यूब चैनल ‘Online IAS Classes by Virendra Ojha’ और एक ऐप ‘Margdarshaneducation.com’ के नाम से संचालित होते हैं।