Skip to content

549 या अधिक की खरीद पर डिलीवरी फ्री

449 या अधिक की खरीद पर कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प उपलब्ध (COD Charges: INR 50)
इलाहाबाद ब्लूज़
प्रकाशक: हिन्द युग्म प्रकाशन
(2 customer review)

100 (-33%)

Age Recommendation: Above 12 Years
ISBN: 978-9387464865 SKU: HY2363 Category:

Free Shipping for SV Prime Members

Estimated Dispatch: November 28, 2022

Check Shipping Days & Cost //

2 reviews for इलाहाबाद ब्लूज़

5.0
Based on 2 reviews
5 star
100
100%
4 star
0%
3 star
0%
2 star
0%
1 star
0%
  1. Avatar

    anurag.eib

    इलाहाबाद जिंदाबाद

    (0) (0)
  2. Avatar

    साहित्य विमर्श (store manager)

    बेहतरीन

    (1) (0)

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.

Cancel

More Info

‘इलाहाबाद ब्लूज़’ दास्ताँ है साँस लेते उन संस्मरणों की जहाँ इतिहास, संस्कृति और साहित्य की गोद से ज़िंदगी निकल भी रही है और पल-बढ़ भी रही है। इस पुस्तक से गुज़रते हुए पाठकों को यह लगेगा कि वो अपने ही जीवन से कहीं गुज़र रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की गँवई ज़मीन से शुरू हुई यह यात्रा इलाहाबाद होते हुए यूपीएससी, धौलपुर हाउस और दिल्ली तक का सफ़र तय करती है। ‘इलाहाबाद ब्लूज़’ एक मध्यमवर्गीय जीवन की उड़ान है। इसलिए इसमे जहाँ गाँव की मिट्टी की सोंधी ख़ुशबू है, वहीं इलाहाबाद की बकैती, छात्र जीवन की मसखरी और फक्कड़पन भी इस पुस्तक की ख़ासियत है।

मिडिल क्लास ज़िंदगी के विभिन्न रंगों से सजे हुए संस्मरण बहुत ही रोचक एवं मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें एक बोलती-बतियाती, जीती-जागती ज़िंदगी है, संघर्ष है, प्रेम है, पीड़ा है, अथक जिजीविषा है और अंत में कभी भी हार ना मानने का दृढ़-संकल्प है। पहले से आख़ि‍री पृष्ठ तक आप कब स्वयं ‘अंजनी’ होते हुए इस पुस्तक से निकलेंगे, यह आपको एहसास ही नहीं होगा।.

Book Details

Weight 200 g
Dimensions 13.5 × .7 × 20 cm
Pages:   136

‘इलाहाबाद ब्लूज़’ दास्ताँ है साँस लेते उन संस्मरणों की जहाँ इतिहास, संस्कृति और साहित्य की गोद से ज़िंदगी निकल भी रही है और पल-बढ़ भी रही है। इस पुस्तक से गुज़रते हुए पाठकों को यह लगेगा कि वो अपने ही जीवन से कहीं गुज़र रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ की गँवई ज़मीन से शुरू हुई यह यात्रा इलाहाबाद होते हुए यूपीएससी, धौलपुर हाउस और दिल्ली तक का सफ़र तय करती है।

‘इलाहाबाद ब्लूज़’ एक मध्यमवर्गीय जीवन की उड़ान है। इसलिए इसमे जहाँ गाँव की मिट्टी की सोंधी ख़ुशबू है, वहीं इलाहाबाद की बकैती, छात्र जीवन की मसखरी और फक्कड़पन भी इस पुस्तक की ख़ासियत है। मिडिल क्लास ज़िंदगी के विभिन्न रंगों से सजे हुए संस्मरण बहुत ही रोचक एवं मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें एक बोलती-बतियाती, जीती-जागती ज़िंदगी है, संघर्ष है, प्रेम है, पीड़ा है, अथक जिजीविषा है और अंत में कभी भी हार ना मानने का दृढ़-संकल्प है।

पहले से आख़ि‍री पृष्ठ तक आप कब स्वयं ‘अंजनी’ होते हुए इस पुस्तक से निकलेंगे, यह आपको एहसास ही नहीं होगा।

अंजनी कुमार पांडेय का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ ज़ि‍ले में हुआ। इलाहाबाद की आबो-हवा में पलते-बढ़ते इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और परास्नातक किया। दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर 2010 में सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय राजस्व सेवा में अधिकारी बने और वर्तमान में आयकर विभाग, सूरत में ज्वॉइंट कमिश्नर के रूप में कार्यरत हैं। अंजनी सरकारी सेवा के बाद बचे हुए समय में दिव्यांगों की सेवा को अपना धर्म मानते हैं। समय-समय पर इनके लेख विभिन्न पत्रिकाओं, ऑनलाइन पोर्टल्स और न्यूज़पेपर में आते रहते हैं। फ़ेसबुक पर भी इनके लेख काफ़ी पॉपुलर होते हैं। ‘इलाहाबाद ब्लूज’ इनका हिंदी साहित्य में पहला प्रयास है