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आदी पादी दादी
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ISBN: 978-81-952171-6-8 SKU: SV949 Category:

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    Abhishek Singh Rajawat (सहपाठी)

    बच्चों के हिसाब से रोचक तथा मनोरंजक सचित्र कथाएं…

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कहानियों के मैदान में लड़कों की दादागिरी ही क्यों चले। ऐसी कौन सी शैतानी है जो लड़कियाँ नहीं कर सकतीं? मस्ती के कौन से मैदान में लड़कियाँ अपनी धाक नहीं जमा सकतीं?
वैसे समझने की बात यह भी है कि लड़कियों की टीम में दादी-नानी, माँ-मौसी, चाची-मामी सब आती हैं।
तभी तो ‘आदी पादी दादी’ की कहानियों में मुख्य भूमिका निभाई है लड़कियों ने।
और दादी, नानी, माँ, मौसी, चाची-मामी, दीदी, छुटकी सब की सब लड़कियाँ ही तो हैं।
हाँ, कहीं-कहीं लड़कों को भी भूमिका या रोल दिए गए हैं लेकिन वे सहायक भूमिकाओं में हैं जिन्हें फिल्मी भाषा में कहा जाता है एक्स्ट्रा हाऽऽहा-हीऽहीऽहीऽहीऽ!!!!
वैसे लड़कियों की दुनिया की इन कहानियों को पढ़ कर लड़कों को भी पूरा मजा आएगा, क्योंकि इन कहानियों की हीरो या हीरोइनें उनकी भी तो दादी-नानी, माँ-मौसी, चाची-मामी, दीदी या प्यारी बहन हैं।
तो शुरू कर दो पढ़ना..

• जन्म- 27 नवंबर 1955, देहरादून, उत्तराखंड (तत्कालीन उ.प्र.), • एम.एस.सी. (गणित), एम.ए. (हिन्दी) • बचपन तथा युवावस्था का प्रथम चरण देहरादून में बीता • सार्वजनिक क्षेत्र की एक बीमा कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में लगभग दो दशक तक सेवा प्रदान की • अस्सी के दशक में बाल-साहित्य लेखन की शुरूआत, तत्कालीन सभी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। दो बाल कथा कहानी संग्रह, दो बाल उपन्यास पुस्तक रूप में। दो बाल उपन्यास प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशनार्थ स्वीकृत। एक कहानी संग्रह ‘कहानी पार्क’ सलिला संस्था द्वारा 2020 में पुरस्कृत • 600 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित • रेडियो से 80 से अधिक रचनाएँ/नाटक प्रसारित • अनेक कहानियाँ चर्चित व अन्य भाषाओं में रूपान्तरित • नौकरी के सिलसिले में 1985 में मुंबई आगमन और यहीं स्थायी प्रवास • हिन्दी विज्ञापन लेखन से जुड़ना तथा तीन दशकों से अधिक समय से इस क्षेत्र में सक्रिय तकरीबन हर विज्ञापन एजेन्सी और हर ब्रांड के लिए हिन्दी विज्ञापन (प्रिंट, रेडियो, टीवी) लेखन • सन 2004 में नौकरी से त्यागपत्र देकर पूरी तरह विज्ञापन लेखन • छुटपुट रूप से धारावाहिक तथा टेलीफिल्म के लिए संवाद लेखन भी • रेडियो के लिए अनेक प्रायोजित कार्यक्रम लिखे • कुछ पुस्तकों का अनुवाद • गत 2 वर्षों से बच्चों के लिए लेखन में पुन: सक्रिय